बल्गारियाई लोककथा

martenitsi

बहुत पुरानी बात है। तब मार्च के महीने में केवल 28 दिन होते थे और फरवरी में 31 दिन। एक वर्ष फरवरी माह के अंतिम दिन घूप खिली हुई थी। सुहाना दिन था। एक बूढ़ी औरत ने यह निश्चय किया कि वह आज सही समय से पहले ही अपनी बकरियों को चराने पहाड़ों पर जाएगी। बुढ़िया ने खुद से ही कहा: बाबा मार्ता (मार्च वाली दादी) भला क्यूँ बुरा मानेगी? वो भी तो मेरी तरह एक दादी ही है!

बाबा मार्ता ने यह बातचीत सुन ली और बूढ़ी औरत को अपनी बकरियों के साथ पहाड़ों की ओर जाते गुस्से से देखा। बाबा मार्ता तुरंत अपने भाई छोटा-सेश्को (फरवरी) के पास भागकर गई और कहा “ अब समय आ गया कि तुम मुझे मेरी शराब चुराने का हर्जाना दो। अपने 31 दिनों में से तीन दिन मुझे दे दो ताकि मैं उस बुढ़िया को मार पाउँ जो अपनी बकरियों को समय से पहले ही चराने के लिए  जा रही है। छोटा सेश्को ने यह याद करते हुए कि किस तरह बाबा मार्ता ने एक बार उसकी दाढ़ी को गंदा करने की धमकी दी थी, अपने तीन दिन उसे दे दिए।

तब मार्ता ने ठंडी हवा बहानी शुरू कर दी, बर्फ गिरने लगी और मौसम बेहद ठंडा हो गया। यह सब तीन दिन और तीन रात तक चलता रहा। पहाड़ों पर गई बूढ़ी औरत ठंड से काँपने लगी, उसका खून जम गया, और अंत में वह ठंड से पत्थर बन गई।

आखिरकार तीन दिन बाद बाबा मार्ता का गुस्सा ठंडा हुआ और सूरज निकल आया। मौसम फिर से सुहाना हो गया।

मौसम साफ होने के बाद गाँव के लोगों को बूढ़ी औरत की याद आई, और उन्होंने उसे पहाड़ों पर खोजना शुरू किया। काफी खोजने के बाद उन्हें बुढ़िया पत्थर बनी दिखाई पड़ी। उसके शरीर के पिछले हिस्से से एक छोटा पानी का झरना बह रहा था। पहाड़ो पर चढ़ने के बाद लोगों को बहुत प्यास लगी थी लेकिन उन्होंने हँसी और शर्म के मारे उस झरने से पानी नहीं पीया। तो इस तरह से बाबा मार्ता के पास 31 दिन और छोटा सेश्को के पास 28 दिन आए।

बल्गारिया में मार्च की पहली तारीख से वसंत ऋतु की शुरूवात मानी जाती है। मार्च के महीने को बाबा मार्ता (मार्च की दादी) से जोड़कर देखा जाता है। बाबा मार्ता एक गुस्सैल बुढ़ी औरत है जिसकी कमर झुकी हुई है। बल्गारिया में बाबा मार्ता के बदलते दिमाग को मार्च के महीने के बदलते मौसम के समान माना जाता है। उसका भाई छोटा सेश्को (फरवरी) शराब पीने का शौकीन है।

हर साल पहली मार्च को पूरे बल्गारिया में लोग एक दूसरे को लाल और सफेद रंग के धागे या उनसे बनी छोटी गुड़िया जिसे मार्तेनित्सा कहते हैं, बांधकर अच्छे स्वास्थ और खुशी की शुभकामनाएँ देते हैं। कुछ दिन बाद इसे किसी फलदार या फूलदार पेड़ से बांध दिया जाता है या किसी पत्थर की नीचे रख दिया जाता है।

लोककथा का स्रोत: 

http://www.spellintime.fsnet.co.uk/Folklore_Section_Tales.htm

हिन्दी अनुवाद: अभिषेक अवतंस


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