अलजेब्रा (algebra) को हिन्दी में बीजगणित कहा जाता है। बीज गणित की आधुनिक परिभाषा निम्नलिखित है – अंकगणितीय नियमों का व्यापकीकरण अथवा संख्याओं के गुणधर्मो का संकेताक्षरों क, ख, ग आदि द्वारा अमूर्त अनुसंधान बीजगणित कहलाता है। बीजगणित शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – बीज एवं गणित। बीज शब्द के कई अर्थ हैं जिनमें दाना (seed), उत्पत्ति, स्रोत, कारण आदि प्रमुख हैं। गणित शब्द का मूलार्थ है जिसे गिना गया हो, जिसका हिसाब लगाया गया हो। इसके अन्य अर्थ हैं – गिनना, हिसाब लगाना आदि। इस प्रकार से यह अंग्रेज़ी के मैथ्स (Maths) शब्द का पर्याय है।
जापानी विद्वान ताकाओ हायाशी (1994) के अनुसार बीजगणित नाम प्राचीन काल में अलजेब्रा (Algebra) के लिए इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें किसी अज्ञात संख्या के चिह्न के लिए बीज (seed) का उपयोग होता था। इस प्रकार से बीजगणित वह गणना थी जिसमें बीज (अज्ञात संख्या के चिह्न) की सहायता से फल (fruit) अर्थात परिणाम प्राप्त होता था।
दूसरी ओर कुछ अन्य विद्वान जैसे हेनरी थॉमस कोलब्रूक (1817) मानते हैं कि बीजगणित शब्द बीज के उत्पत्ति, स्रोत, कारण वाले अर्थ से व्युत्पन्न है। इस हिसाब से बीजगणित का अर्थ हुआ कारणों की गणना अर्थात विश्लेषण (analysis) करने वाला गणित बीजगणित है।
बीज का एक अन्य अर्थ तत्व (elements) है। इस प्रकार से बीजगणित का का अर्थ हुआ – वह गणित जिसमें तत्वों द्वारा परिगणन किया जाता है।
बीजगणित शब्द के निम्नलिखित पर्याय हैं – कुट्टकगणित एवं अव्यक्तगणित
बीजगणित के एक भेद जिसमें अनिर्णित समीकरणों (Indeterminate equations) की गणना की जाती है, उसका संस्कृत नाम कुट्टक (Pulverizer) था। संभव है कि इसी प्रकरण के आधार पर बीजगणित को कुट्टकगणित भी पुकारा जाता था।
संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों में बीजगणित को अव्यक्तगणित भी बुलाया गया। ऐसा इसलिए कि अंकगणित (arithmetic) में सभी संख्याओं का मान पहले से ही ज्ञात होता है, अतः यह व्यक्त गणित है। दूसरी ओर बीजगणित में सभी संख्याओं का मान ज्ञात नहीं होता, अतः यह अव्यक्तगणित है।
1865 में लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी बीजगणित (पहिला भाग) नामक पुस्तक को स्कूल के विद्यार्थियों को बीजगणित सिखाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इस पुस्तक के लेखक पंडित मोहनलाल थे। हालांकि हिन्दी में छपी बीजगणित की आधुनिक पुस्तकों में अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षरों का उपयोग होता है, इस पुस्तक में देवनागरी के अक्षरों का उपयोग हुआ था। Addition के लिए संकलन, substraction के लिए व्यवकलन, multiplication के लिए गुणन तथा division के लिए भाग जैसे शब्दों का उपयोग किया गया था।
पुस्तक आप यहाँ पढ़ सकते हैं
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