एक समय की बात है एक राज्य के राजा ने सोचा कि वह भेष बदलकर अपनी प्रजा के हालात का मुआयना करेगा। पूरे दिन अपने राज्य में घूमने के बाद उसे गरीब लोग मेहनत करते दिखे। उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। राजा को लगा कि शायद लोग उसके राज में खुश नहीं है।

अगले दिन उसने तुरंत अपने मंत्रियों को बुलवाकर राज्य में यह मुनादी करवा दी कि आज से राज्य का हर आदमी हमेशा हँसता रहेगा। अगर कोई आदमी हँसता हुआ नहीं पाया गया तो उसे फाँसी पर लटका दिया जाएगा। बस फिर क्या सब लोग हँसने लगे। कोई रोता भी तो छिप-छिप के रोता। कोई झगड़ता भी तो हँस-हँस के झगड़ता। समय बीतता गया। कुछ साल बाद एक दिन राजा का बेटा (राजकुमार) जंगल में शिकार खेलते हुए घोड़े से गिरकर मर गया। राजा उस समय अपने दरबार में बैठा था।

दूत ने वहाँ आकर हँसते हुए कहा कि राजकुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे। इसपर मंत्रियों ने भी हँस-हँस कर अपना दुख प्रकट किया। यह देखकर राजा आगबबूला हो गया। उसने गुस्से में कहा – यहाँ मेरा बेटा मर गया और तुम सबलोग हँस रहे हो। आज से कोई नहीं हँसेगा। आज से सबलोग हमेशा रोएंगे। अगर कोई आदमी रोता हुआ नहीं पाया गया तो उसे फाँसी पर लटका दिया जाएगा। फिर क्या सब लोग हमेशा रोने लगे। कोई अधिक खुश भी हो जाता तो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगता। कोई झगड़ता भी तो रो-रो कर झगड़ता। समय बीतता गया।

कुछ साल बाद एक दिन राजा की रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया। दूत ने दरबार में आकर रोते हुए यह खुशखबरी सुनाई। दरबार में बैठे मंत्रियों ने रोते हुए राजा को बधाई दी। यह देखकर राजा ने गुस्से में कहा – मेरा बेटा पैदा हुआ है और आप लोग रो रहे हैं। आज से कोई नहीं रोएगा। तब सब लोग फिर भावहीन हो गए।
इसलिए कहा गया है राजा के सामने हँसे तो भी ग़लत है और रोए तो ग़लत। यानी कि बॉस इज ऑलवेज राइट। 🙂
(शुक्रिया मेरे पुराने दफ्तर के दुबे जी (सचिवालय) का जिन्होंने मुझे एक दिन यह कहानी सुनाई थी।)


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