किसी भी शब्द की शब्द की तीन शक्तियाँ मानी गई हैं। अभिधा मुख्य अर्थ का बोध कराती है, लक्षणा गौण अर्थ का बोध कराती है, एवं व्यंजना शब्द की वह शक्ति है जो मुख्य और गौण अर्थ के अतिरिक्त अन्य अर्थ का बोध कराती है। इस प्रसंग में यह संक्षिप्त कथा पढ़ें:

राजा भोज की सभा में एक ब्राह्मण कवि पहुँचे जो बहुत दरिद्र थे। नौकरी चाहते थे।

राजा भोज ने कहा : ‘कोई कविता सुनाओ।’

कवि बोले : “दुग्धं पिबति बिडाला” (अर्थात ‘बिल्ली दूध पीती है’)।

राजा ने कहा : यह भी कोई कविता है?

कविवर बोले : महामहीम इसमें किस वस्तु का अभाव है?

राजा बोले : अरे भाई इस प्रकार कहीं कविता होती है कि तीन शब्द कह दिए और कविता हो गई। कविता में चार चरण (अर्थात पद) होते हैं।
कविवर बोले : महाराज बिल्ली के चार ही चरण (अर्थात पैर) तो होते हैं।
राजा : किन्तु कविता में रस (अर्थात कविता का भाव या आनंद) भी तो होना चाहिए?
कवि : महाराज दूध से अधिक रसवान वस्तु संसार में है क्या ? दूध बहुत मीठा होता है।

राजा : परन्तु कविता में कोई अर्थ भी तो होना चाहिए।
कविराज : महाराज यदि मेरे पास अर्थ (अर्थात धन) होता तो मैं आपके पास क्यों आता?
राजा उनकी त्वरित बुद्धि से अतिप्रसन्न हुए और उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा में नियुक्त कर लिया।


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